ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई
नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और एनर्जी सप्लाई को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ा दी है. यह फैसला इस इलाके में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बढ़ते खतरे के मद्देनजर लिया गया है.
नौसेना का मुख्य मकसद भारतीय झंडे वाले टैंकरों और जहाजों को सुरक्षित भारत तक पहुंचाना है. सुरक्षा के इसी घेरे में INS शिवालिक, आईएनएस सुनयना और जग लाडकी सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं.
बदलते भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है. तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे, इसके लिए नौसेना ने स्टेट ऑफ होर्मूज से लेकर ओमान की खाड़ी तक अपने युद्धपोतों की तैनाती को और मजबूत कर दिया है. हालांकि, भारतीय युद्धपोत इस क्षेत्र में पहले से ही लगातार पेट्रोलिंग करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए निगरानी और सुरक्षा उपायों को और तेज कर दिया गया है.
स्टेट ऑफ होर्मूज में संकट बढ़ने के बाद इस इलाके में नौसेना के तीन युद्धपोत की मौजूदगी देखी गई, जो होर्मूज के बाद भारतीय झंडा वाले जहाजों को आगे तक सुरक्षित जाने में एस्कार्ट करते थे. अब एनडीटीवी को जानकारी मिली है कि अब इस इलाके नौसेना के कम से 6 से 8 युद्धपोत मौजूद है, जो यह सुनिश्चित कर रहे है कि भारतीय तेल टैंकर और कार्गो जहाज पर कोई हमला न हो.
इसकी बड़ी वजह है कि भारत किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नही हैं. इस जंग में वह न तो अमेरिका और इजरायल के साथ खड़ा दिखना चाहता है और न ही ईरान की तरफ. ऐसे में भारत की कोशिश है कि उसके एलपीजी और क्रूड ऑयल खाड़ी देशों से होकर सुरक्षित आ जाए. इसके लिए वह युद्धपोत के साथ-साथ ड्रोन और निगरानी विमान का भी इस्तेमाल कर रहा है. ताकि आने वाले खतरे को टाला जा सके. इस इलाके में अतिरिक्त युद्धपोतों की तैनाती भी एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम है.
सूत्रों की मानें तो पहले यहां 3 युद्धपोत तैनात थे. वहीं, अब उनकी तादाद बढ़ाकर 6 से 8 कर दी गई है. इसमें डिस्ट्रायर से लेकर फ्रिगेट भी शामिल है. इन युद्धपोतों को अपने रडार, सैटेलाइट और अन्य निगरानी सिस्टम से लगातार जानकारी मिलती रहती है. ये युद्धपोत हर तरह के हथियार से लैस है. ब्रह्मोस से लेकर बराक मिसाइल के अलावा ये टारपीडो और गन के साथ 24 घंटे तैनात रहते है. ये होर्मूज के बाहर से उत्तर पश्चिम अरब सागर के खतरनाक इलाकों में जहाजों को एस्कार्ट कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. एक और बड़ी वजह यह भी है कि नौसेना अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये अकेले ऑपरेशन चला रही है. इस वजह से वह कोई रिस्क लेने के मूड में नही है.