गर्भगृह के द्वितीय तल पर हुई ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना
अयोध्या/लखनऊ : अयोध्या। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को श्रीराम मंदिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में श्रीराम यंत्र का पूजन किया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु डेढ़ वर्ष के अंतराल पर दूसरी बार अयोध्या पहुंची और राम मंदिर में श्रीराम यंत्र को स्थापित किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राम मंदिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में श्रीराम यंत्र के पूजन के दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि, राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव, ट्रस्टी डॉ अनिल कुमार मिश्र के अन्य गणमान्य मौजूद थे। यह कार्यक्रम राम मंदिर के लिए एक अत्यंत ऐतिहासिक क्षण है, जो 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद संपन्न हुआ।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अयोध्या के राम मंदिर के द्वितीय तल पर जिस श्रीराम यंत्र को स्थापित किया है, वह 150 किलोग्राम सोने से निर्मित एक दिव्य यंत्र है। चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के शुभ अवसर पर स्थापित यह यंत्र घर में समृद्धि, सुख और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए विशेष अवसर है।
राष्ट्रपति ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तों के लिए खुलना और मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण—ये सभी हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।
राम राज्य को बताया आदर्श मार्ग : द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि देश एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से 2047 तक इन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।
श्रीराम यंत्र को जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने भेजा था। इसे स्थापित करने का उद्देश्य मंदिर के वातावरण में शुद्धता और सकारात्मकता बनाए रखना है। माना जाता है कि यह यंत्र नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। यह पितृ दोष, शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के दुष्प्रभावों को कम कर सकता है। यह यंत्र भगवान राम की शक्ति का प्रतीक है, जिसे विशेष पूजा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित गया है।